Maan ki baatein
मजबूर ये हालात इधर भी हैं, उधर भी
कुछ सीटें कम हैं इधर भी, और उधर भी
कहने को बहुत कुछ हैं मगर किससे कहें हम
कब तक खामोश रहें और सहे हम
दिल कहता हैं राजनीती की हर एक रस्म मिटा दे
दिवार जो हम दोनो में हैं वो गिरा दे
क्यों विरोधी बन के सुलगते रहे हम, लोगो को बता दे...
हां ...हमको युती हैं, युती हैं, युती हैं
और
दिल में ये बात.......
इधर भी हैं, और उधर भी !!
😎
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